23/3/16

पग घुँघरू बांध मीरा //Namak Halaal - Ke Pag Ghunghroo Bandh Meera - Kishore Kumar - Chorus

पग घुँघरू बांध मीरा
फिल्म -नमक हलाल
गायक - किशोर कुमार
पर्दे पर -अमिताभ बच्चन
1982

song

बुजुर्गों ने फ़रमाया की पैरों पे अपने खड़े होके दिखलाओ
फिर ये ज़माना तुम्हारा है

ज़माने के सुर ताल के साथ चलते चले जाओ

फिर हर तराना तुम्हारा, फ़साना तुम्हारा है

अरे तो लो भैया हम

अपने पैरों के ऊपर खड़े हो गए

और मिला ली है ताल

दबा लेगा दाँतों तले उँगलियाँ-लियां

ये जहां देखकर, देखकर अपनी चाल


के पग घुंघरू बाँध मीरा नाची थी
और हम नाचे बिन घुंघरू के
वो तीर भला किस काम का है
जो तीर निशाने से चूके-चूके-चूके रे

बाखुदा शक्ल से तो चोर नज़र आते हैं
उम्र गुज़री है सारी चोरी में

सारे सुख-चैन बंद जुर्म की तिजोरी में 

आपका तो लगता है बस यही सपना

राम-राम जपना, पराया माल अपना

वतन का खाया नमक तो नमक हलाल बनो

फ़र्ज़ ईमान की जिंदा यहाँ मिसाल बनो

पराया धन, परायी नार पे नज़र मत डालो

बुरी आदत है ये, आदत अभी बदल डालो

क्योंकि ये आदत तो वो आग है जो
इक दिन अपना घर फूंके-फूंके-फूंके रे
के पग घुंघरू...

मौसम-ए-इश्क में मचले हुए अरमान है हम
दिल को लगता है के दो जिस्म एक जान है हम
ऐसा लगता है तो लगने में कुछ बुराई नहीं
दिल ये कहता है आप अपनी हैं पराई नहीं
संगमरमर की हाय, कोई मूरत हो तुम

बड़ी दिलकश बड़ी ख़ूबसूरत हो तुम

दिल-दिल से मिलने क कोई महूरत हो

प्यासे दिलों की ज़रुरत हो तुम

दिल चीर के दिखला दूं मैं, दिल में यहीं सूरत हसीं

क्या आपको लगता नहीं हम हैं मिले पहले कहीं

क्या देश है क्या जात है

क्या उम्र है क्या नाम है

अरे छोड़िये इन बातों से
हमको भला क्या काम है
अजी सुनिए तो
हम आप मिलें तो फिर हो शुरू
अफ़साने लैला मजनू, लैला मजनू के
के पग घुंघरू...


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