मंगलवार, 12 अप्रैल 2016

ना आदमी का कोई भरोसा Mohd Rafi Na Aadmi Ka Koi Bharosa Aadmi 1968

ना आदमी का कोई भरोसा
na adami ka koi bharosa
 Rafi,
1968,
fil-Adami

      SONG 

तेरी मोहब्बत पे शक नही है, तेरी वफाओ को मानता हू
मगर तुजे किस की आरजू है, मै ये हकीकत भी जानता हू

ना आदमी का कोइ भरोसा, ना दोस्ती का कोइ ठिकाना
वफ़ा का बदला है बेवफाई, अजब ज़माना है ये ज़माना

ना हुस्न मे अब वो दिलकशी है, ना इश्क मे अब वो जिन्दगी है
जिधर निगाहे उठा के देखो, सितम है धोखा है बेरुखी है
बदल गए जिन्दगी के नगमे, बिखर गया प्यार का तराना

दवा का बदले मे जहर दे दो, उतार दो मेरे दिल मे खंजर
लहू से सीचा था जिस चमन को, उगे है शोले उस ही के अन्दर
मेरे ही घर के चिराग ने खुद, जला दिया मेरा आशियाना


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