15/5/16

रात आई है रंग जमाने के लिए// AMRIT MANTHAN 1934: Raat aayi hai nayaa rang jamaane ke liye (Shanta Apte)

रात आई है रंग जमाने के लिए
 AMRIT MANTHAN 
1934:
 Raat aayi hai nayaa rang jamaane ke liye 


     SONG
रात आई है नया रंग जमाने के लिए
लेके आराम का पैग़ाम ज़माने के लिए
गुनगुनाती हुई धीरे से ये आती है सबा
>थपकियाँ माँ की तरह दे के सुलाने के लिए
कैसे बेरहमी से बिखरे हैं ये लाल-ओ-गोहर
आसमाँ क्या तेरी दौलत है लुटाने के लिए
क्या ही अच्छा है ये बचपन का ज़माना भी यहाँ
मौज करने के लिए, खेलने खाने के लिए

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें