सोमवार, 6 जून 2016

खत लिख दे साँवरिया के नाम बाबू Khat likh de sanwariya ke-Aaye Din Bahaar Ke-Anand Bakshi-Laxmikant Pyar...


 

अब के बरस भी बीत न जाये
ये सावन की रातें
और लिख दे दो बातें ...
देख ले मेरी ये बेचैनी


कोरे कागज़ पे लिख दे सलाम बाबू
खत लिख दे सांवरिया के नाम बाबू
कैसे होती है सुबह से शाम बाबू ) \- २
वो मान जाएंगे, पहचान जाएंगे
खत लिख दे ...


ले गई बैरन शहर पिया को
सारे वादे निकले झूठे
सामने हो तो कोई उनसे रूठे
कोरे कागज़ पे लिख दे सलाम बाबू
राम करे कि ऐसी नौकरी छूटे
उन्हें जिसने बनाया गुलाम बाबू
जब आएंगे सजना मेरे
वो जान जाएंगे, पहचान जाएंगे
कैसे होती है सुबह से शाम बाबू


खन खन खनकेंगे कँगना मेरे
कोरे कागज़ पे लिख दे सलाम बाबू
पास गली में घर है मेरा
उस दिन तू भी आना अँगना मेरे
कुछ तुझको मैं दूँगी ईनाम बाबू
कैसे बता दूँ तुझे तू बेगाना
वो जान जाएंगे, पहचान जाएंगे
कैसे होती है सुबह से शाम बाबू
खत लिख दे ...


और बहुत कुछ है लिखवाना
वो मान जाएंगे, पहचान जाएंगे
शर्म से आँखें झुक जाएंगी
धड़क उठेगा मोरा दिल दीवाना
बस आगे नहीं तेरा काम बाबू
कोरे कागज़ पे लिख दे सलाम बाबू
खत लिख दे ...
कैसे होती है सुबह से शाम बाबू

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