शनिवार, 22 जुलाई 2017

किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत-महेन्द्र कपूर

फ़िल्म- हमराज़ , 
गीत- साहिर लुधियानवी, 
संगीत- रवि, 
गायक- महेन्द्र कपूर
 
   SONG
किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है, इबादत का इरादा है (2)
किसी पत्थर की मूरत से
जो दिल की धडकनें समझे, ना आँखों की जुबाँ समझे (2)
नज़र की गुफ़्तगू समझे, ना जजबों का बयाँ समझे (2)
उसी के सामने उसकी शिकायत का इरादा है (2)
किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है, इबादत का इरादा है
किसी पत्थर की मूरत से
सुना है हर जवाँ पत्थर के दिल में आग होती है (2)
मगर जब तक ना छेड़ो शर्म भी पर्दे में सोती है
ये सोचा है के दिल की बात उस के रूबरू कह दे
नतीजा कुछ भी निकले आज अपनी आरज़ू कह दे
हर एक बेज़ाँ तकल्लुफ से बग़ावत का इरादा है (2)
किसी पत्थर की मूरत से
मोहब्बत बेरुख़ी से और भड़केगी वो क्या जाने (2)
तबीयत इस अदा पे और फड़केंगीं वो क्या जाने (2)
वो क्या जाने के अपना किस क़यामत का इरादा है (2)
किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है, इबादत का इरादा है
किसी पत्थर की मूरत से

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