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14/10/19

आ आ कैसे समझाऊँ बड़ी नासमझ हो -आशा भोसले, मोहम्मद रफ़ी

 आ आ कैसे समझाऊँ बड़ी नासमझ हो 
 सुरज-(Suraj)
 शंकर - जयकिशन
हसरत जयपुरी-
 आशा भोसले,  मोहम्मद रफ़ी

र : आ आ कैसे समझाऊँ बड़ी नासमझ हो -२ हमसे न जीतोगी तुम रहने दो ये बाज़ी कैसे समझाऊँ ... आ : आ आ कैसे समझाऊँ बड़े नासमझ हो -२ आए-गए तुम जैसे सैकड़ों अनाड़ी कैसे समझाऊँ ... र : हम दिल का साज़ बजाते हैं दुनिया के होश उड़ाते हैं हम सात सुरों के सागर हैं हर महफ़िल में लहराते हैं -२ कैसे समझाऊँ ... आ : तुम साज़ बजाना क्या जानो तुम रंग जमाना क्या जानो -२ महफ़िल तो हमारे दम से है तुम होश उड़ाना क्या जानो -२ कैसे समझाऊँ ... मैं नाचूँ चाँद-सितारों पर शोलों पर शरारों पर र : हम ऐसी कला के दीवाने छा जाएँ नशीली बहारों पर कैसे समझाऊँ ...

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