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6/3/16

कहीं दूर जब दिन ढल जाये //Anand - Kahin Door Jab Din Dhal Jaaye Saanj - Mukesh

कहीं  दूर जब दिन ढल जाये
गीतकार : योगेश,
 गायक : मुकेश
, संगीतकार : सलील चौधरी,
 चित्रपट : आनंद (१९७१)


      SONG 

कहीं दूर जब दिन ढल जाए
साँझ की दुल्हन बदन चुराए
चुपके से आए
कोई सपनों के दीप जलाए, दीप जलाए
मेरे ख़यालों के आँगन में
कभी यूँहीं, जब हुईं, बोझल साँसें
कहीं दूर ...

तभी मचल के, प्यार से चल के
भर आई बैठे बैठे, जब यूँ ही आँखें

छुए कोई मुझे पर नज़र न आए, नज़र न आए
कहीं दूर ...
घनी थी उलझन, बैरी अपना मन
कहीं तो ये, दिल कभी, मिल नहीं पाते
कहीं से निकल आए, जनमों के नाते
दिल जाने, मेरे सारे, भेद ये गहरे
अपना ही होके सहे दर्द पराये, दर्द पराये
कहीं दूर ...

खो गए कैसे मेरे, सपने सुनहरे
कहीं दूर ...
ये मेरे सपने, यही तो हैं अपने
मुझसे जुदा न होंगे इनके ये साये, इनके ये साये



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