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19/10/19

‘जीने से भी ज्यादा जिएं’, लिरिसिस्ट: मनोज यादव, फिल्म: धनक


‘जीने से भी ज्यादा जिएं’
लिरिसिस्ट: मनोज यादव
फिल्म: धनक


मुट्ठी है छोटी
पाना है सारा
इससे कम में ना
करना गुज़ारा

हम क्या जानें
क्या है अंधेरा
आंखों में रक्खे
हम अपना सवेरा
खारी रेत के खेत में
मीठे ख्वाब गाएं
मीलों रास्ता रास्ता
पैरों में सजाएं
हो जीने से भी ज्यादा जिएं
उड़ानों से भी आगे उड़ें
ख्वाहिशें आसमानी ज़िंदा हैं
उम्मीद तो फिकर क्या

रे थक कर क्यूं भला हम थम जाएं
चलो ना थोड़ा हौसलों को समझाएं
हो आंधियों से शर्त लगाएं
के ज़िंदगी की आंख से आंख मिलाएं
जाए मंजिलों से लिपटकर आएं
खारी रेत के खेत में
मीठे ख्वाब गाएं
मीलो रास्ता रास्ता
पैरों में सजाए

हो जीने से भी..

इन कदमों ने जीत ली है सब राहें

बांहों ने थामी आसमान की बांहें

चलो जी खुशियों के घर हो आएं

के कोना कोना मुस्कानों से सजाएं

ख्वाबों की आंखों को धनक पहनाएं

खारी रेत के खेत में..

हो जीने से भी..

रे थक कर क्यूं भला हम थम जाएं
चलो ना थोड़ा हौसलों को समझाएं
हो आंधियों से शर्त लगाएं
के ज़िंदगी की आंख से आंख मिलाएं
जाए मंजिलों से लिपटकर आएं
खारी रेत के खेत में
मीठे ख्वाब गाएं
मीलो रास्ता रास्ता
पैरों में सजाए

हो जीने से भी..

इन कदमों ने जीत ली है सब राहें
बांहों ने थामी आसमान की बांहें
चलो जी खुशियों के घर हो आएं
के कोना कोना मुस्कानों से सजाएं
ख्वाबों की आंखों को धनक पहनाएं
खारी रेत के खेत में..
हो जीने से भी..


रे थक कर क्यूं भला हम थम जाएं चलो ना थोड़ा हौसलों को समझाएं हो आंधियों से शर्त लगाएं के ज़िंदगी की आंख से आंख मिलाएं जाए मंजिलों से लिपटकर आएं खारी रेत के खेत में मीठे ख्वाब गाएं मीलो रास्ता रास्ता पैरों में सजाए हो जीने से भी.. इन कदमों ने जीत ली है सब राहें बांहों ने थामी आसमान की बांहें चलो जी खुशियों के घर हो आएं के कोना कोना मुस्कानों से सजाएं ख्वाबों की आंखों को धनक पहनाएं खारी रेत के खेत में.. हो 

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जीने से भी..