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18/10/19

कारी कारी रैना सारी/फिल्म: पिंक


‘कारी कारी’
लिरिसिस्ट: तनवीर ग़ाज़ी
फिल्म: पिंक


कारी कारी रैना सारी
सौ अंधेरे क्यूं लाई, क्यूं लाई
रोशनी के पांव में ये बेड़ियां सी
क्यूं आई.. क्यूं आई..
उजियारे कैसे..अंगारे जैसे
छांव छैली, धूप मैली
क्यूं है री..

तितलियों के पंखों पर
रख दिए गए पत्थर,
ऐ खुदा तू गुम है कहां?
रेशमी लिबासों को
चीरते हैं कुछ खंजर,
ऐ खुदा तू गुम है कहां?

क्या रीत चल पड़ी है,
क्या आग जल पड़ी है,
क्यूं चीखता है सुरमयी धुआं

कारी कारी रैना सारी
सौ अंधेरे क्यूं लाई, क्यूं लाई
रोशनी के पांव में ये बेड़ियां सी
क्यूं आई.. क्यूं आई..
उजियारे कैसे..अंगारे जैसे
छांव छैली, धूप मैली
क्यूं है री..

पंखड़ी की बेटी है,
कंकडों पे लेटी है,
बारिशें हैं तेज़ाब की..
ना ये उठ के चलती है,
ना चिता में जलती है
लाश है ये किस ख़्वाब की..

रातों में पल रही है
सड़कों पे चल रही है
क्यूं बाल खोले देहशतें यहां..

कारी कारी रैना सारी
सौ अंधेरे क्यूं लाई, क्यूं लाई
रोशनी के पांव में ये बेड़ियां सी
क्यूं आई.. क्यूं आई..
उजियारे कैसे..अंगारे जैसे
छांव छैली, धूप मैली
क्यूं है री..

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