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18/10/19

बावली बूच कह दिल की दिल की/लिरिसिस्ट: दुष्यंत/ फिल्म: लाल रंग


‘बावली बूच’
लिरिसिस्ट: दुष्यंत
फिल्म: लाल रंग


बावली बूच कह दिल की दिल की
हाथ थाम के सिल्की सिल्की

कह गए स्याणे, सोच-साच के
सहज पके के तो आवे स्वाद
इश्क पकाया मंदे आंच पे
बहुत पके तो हो बरबाद

खोल खोल गांठ इब मन की
बोल बोल बात इब मन की

दो मन इक हो जायो रे
दिल नई सें, ये गवन के
धरले कदम तू पहचान के
रस्ते इक हो जायो रे

खांड ते मिसरी मिट्ठी
इश्क़ उस ते भी मीठा

आंख ते चखले तू प्यारे
यार का दर्शन मिट्ठा रे
बांध के रखले तू प्यारे

मुंह से कही नहीं मान्नी
दिल से कही नहीं जानी

इब तो संग हो जाओ रे
जिसने सुनी बात मन की
पार लगा नदी मन की
मन का गीत ही गाओ रे
बावली बूच कह दिल की दिल की
हाथ थाम के सिल्की सिल्की
बावली बूच कहीं की.

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