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21/10/15

बार बार तुझे क्या समझाये // bar bar tujhe kya samjhaye payal ki jhankar -आरती

बार बार तुझे क्या समझाये पायल की झंकार
रफी, लता,
bar bar tujhe kya samajhaye,
arti,
1962



बार बार तोहे क्या समझाए ... पायल की झनकार ... 
तेरे बिन साजन... लागे ना जिया हमार ...
छुप छुप के करता हैं इशारें... चंदा सौ सौ बार ... 
आ तोहे सजनी ले चलूं... नदिया के पार... 
.
चलते चलते रुक गए... क्यों सजन मेरे ...
मिलते मिलते झुक गए.. क्यों नैन तेरे .... 
झुके झुके नैना करते हैं... तुमसे ये इकरार ...
तेरे बिन साजन... लागे ना जिया हमार ..
.
दरिया ऊपर चांदनी आई... संभल संभल ..
इन लहरों पर मन मेरा .. गया मचल मचल ... 
एक बात कहता हूँ तुमसे... ना करना इन्कार ... 
आ तोहे सजनी ले चलूं... नदिया के पार ..
.
ना बीते ये रात हम... मिलते ही रहे ... 
बस तारों की छाँव में ... चलते ही रहे ... 
नाम तेरा ले ले कर गाए... धड़कन का हर तार ... 
तेरे बिन साजन... लागे ना जिया हमार .
.


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