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21/10/15

कारे कारे बादरा जा रे जा रे बादरा, लता

कारे कारे बादरा जा रे जा रे बादरा
kare kare badara
lata
bhabhi
1957


जा रे कारे बदरा बलम के द्वार
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार
जा रे कारे बदरा बलम के द्वार
वहीं जा के रो
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार
जा रे कारे बदरा बलम के द्वार
निपट अनाड़ी से लट मोरी उलझी
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार
किनकी पलक से पलक मोरी उलझी
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार
कि लट उलझा के मैं तो गई हार
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार
जा रे कारे बदरा बलम के द्वार
वहीं जा के रो
अंग उन्हीं की लहरिया समाई \-२
गरवा लगा लो कजर समझाओ
तबहूँ ना पूछें लूँ काहे अंगड़ाई
के सौ सौ बल खा के मैं तो गई हार
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार
थाम लो बइयाँ चुनर समझावे
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार
के सब समझा के मैं तो गई हार

14/10/15

चल उड़ जा रे पंछी की अब ये देश हुआ बेगाना //CHAL UD JA RE PANCCHI

चल उड़ जा रे पंछी की अब ये देश हुआ बेगाना
chal udja re panchhi
 भाभी,
रफ़ी


,                   गीत 

चल उड़ जा रे पंछी कि अब ये देश हुआ बेगाना
चल उड़ जा रे पंछी ...
खतम हुए दिन उस डाली के जिस पर तेरा बसेरा था
आज यहाँ और कल हो वहाँ ये जोगी वाला फेरा था
सदा रहा है इस दुनिया में किसका आबू दाना
चल उड़ जा रे पंछी ...
तूने तिनका तिनका चुन कर, नगरी एक बसाई
बारिश में तेरी भीगी काया, धूप में गरमी छाई
ग़म ना कर जो तेरी मेहनत तेरे काम ना आई
अच्छा है कुछ ले जाने से देकर ही कुछ जाना
चल उड़ जा रे पंछी ...


भूल जा अब वो मस्त हवा वो उड़ना डाली\-डाली
जब आँख की काँटा बन गई, चाल तेरी मतवाली
कौन भला उस बाग को पूछे, हो ना जिसका माली
तेरी क़िस्मत में लिखा है जीते जी मर जाना
चल उड़ जा रे पंछी ...


रोते हैं वो पँख पखेरू साथ तेरे जो खेले
जिनके साथ लगाये तूने अरमानों के मेले
भीगी आँखों से ही उनकी, आज दुआयें ले ले
किसको पता अब इस नगरी में कब हो तेरा आना
चल उड़ जा रे पंछी ...


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