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18/10/19

‘दंगल दंगल’-फिल्म: दंगल


‘दंगल दंगल’
लिरिसिस्ट: अमिताभ भट्टाचार्य
फिल्म: दंगल


रे लट्ठ गाड़ दूं
रे जाड़ा पाड़ दूं

मां के पेट से मरघट तक है
तेरी कहानी पग पग प्यारे
दंगल दंगल, दंगल दंगल

सूरज तेरा चढ़ता ढलता
गर्दिश में करते हैं तारे
दंगल दंगल, दंगल दंगल

धड़कनें छाती में
जब दुबक जाती हैं
पीठ थपथपा उनको फिर जगा
बात बन जाती है

बावले हाथी सी
हर चुनौती है रे
सामने खड़ी घूर के बड़ी
आंख दिखलाती है
तो आंख से उसकी आंख मिला के
भिड़ जाने का नाम है प्यारे
दंगल दंगल, दंगल दंगल

सूरज तेरा चढ़ता ढलता
गर्दिश में करते हैं तारे
दंगल दंगल

रे लट्ठ गाड़ दूं
रे जाड़ा पाड़ दूं

ठोस मजबूत भरोसा
अपने सपनों पे करना
जितने मुंह उतनी बातें
गौर कितनों पे करना

आज लोगों की बारी
जो कहे कह लेने दे
तेरा भी दिन आएगा
उस दिन हिसाब चुका के रहना

अरे भेड़ की हाहाकार के बदले
शेर की एक दहाड़ है प्यारे
दंगल दंगल, दंगल दंगल

सूरज तेरा…

रे लट्ठ गाड़ दूं
रे जाड़ा पाड़ दूं

कर दिखाने का मौका
जब भी किस्मत देती है
गिन के तैयारी के दिन
तुझको मोहलत देती है

मांगती है लागत में
तुझसे हर बूंद पसीना
पर मुनाफा बदले में
ये जान ले बेहद देती है

रे बंदे की मेहनत को किस्मत
का सादर परनाम है प्यारे
दंगल दंगल, दंगल दंगल
सूरज तेरा…
दंगल दंगल