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19/10/19

‘नशे सी चढ़ गई ओए’ ,लिरिसिस्ट: जयदीप साहनी ,फिल्म: बेफिक्रे


‘नशे सी चढ़ गई ओए’
लिरिसिस्ट: जयदीप साहनी
फिल्म: बेफिक्रे


नशे सी चढ़ गई ओए
कुड़ी नशे सी चढ़ गई

पतंग सी लड़ गई ओए
कुड़ी पतंग सी लड़ गई

ऐसे खींचे दिल के पेंचे
गले ही पड़ गई ओए

ओ उड़ती पतंग जैसे
मस्त मलंग जैसे
मस्ती सी चढ़ गई
हमको तुरंत ऐसे

लगती करंट जैसे
निकला वारंट जैसे
अभी अभी उतरा हो
नेट से टॉरेंट जैसे

नशे सी चढ़ गई ओए
कुड़ी नशे सी चढ़ गई

खुलती बसंत जैसे
धुलता कलंक जैसे
दिल की दरार में हो
प्यार का सीमेंट जैसे
अंखियों ही अंखियों में
जंग की फरंट जैसे
मिल जाए सदियों से
अटका रिफंड जैसे

जुबां पे चढ़ गई ओए
कुड़ी जुबां पे चढ़ गई
लहू में बढ़ गई ओए
कुड़ी लहू में बढ़ गई

कमली कहानियों सी
जंगली जवानियों सी
जमती पिघलती है
पल पल पानियों सी
बहती रवानियों सी
हंसती शैतानियों सी
चढ़ गई हम पे
बड़ी मेहरबानियों सी
ऐसे खींचे दिल के पेंचे

गले ही पड़ गई ओए
नशे सी चढ़ गई ओए

कुड़ी नशे सी चढ़ गई
पतंग सी लड़ गई ओए
कुड़ी पतंग सी लड़ गई

कनिनिया ओ कट्टे कदी
पन्निया ओ टप्पे कदी
दिल दे चौराहे लंगदी ए

हंसी कदे ठट्टे कदी
गल्लियां ओ नप्पे कदी
हंस के कलेजा मंगदी ए


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