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5/9/18

बदली से निकला है चाँद (संजोग -१९६१)

बदली से निकला है चाँद (संजोग -१९६१)

गीतकार : राजेन्द्र कृष्ण,
गायक : लता मंगेशकर,
संगीतकार : मदन मोहन,


बदली से निकला है चाँद

परदेसी पिया लौट के तू घर आजा


पूछे पता तेरा ठंडी हवायें

चुप मुझे देख के चुप हो जाये

लाये तो कैसे तुझे ढूँढ के लाये


आ के गुजर गयी कितनी बहारें

और बरस गयी कितनी पुहारें

आ जा तुझे हम कब से पुकारे


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि



3/8/16

ढूंडो ढूंडो रे साजना // Dhoondo Dhoondo Re Sajna - Lata - Ganga Jamuna (1961) - HD

ढूंडो ढूंडो रे साजना.
 Dhoondo Dhoondo Re Sajana, 
Lata,
  Ganga Jamuna ,
1961,

      SONG

ढूंढो ढूंढो रे साजना ढूंढो रे साजना
मोरे कान का बाला, हो
मोरे कान का बाला
ढूंढो ढूंढो रे साजना ढूंढो रे साजना
जामें लाले लाले हाँ,
मोरा बाला चन्दा का जैसे हाला रे \- २
मैं सोई थी, अपनी अटरवा
जामें लाले लाले मोतियन की लटके माला, हो ढूंढो ...

ठगवा ने डाका डाला
बाला मोरा बालेपन का


लुट गई निन्दिया, गिर गई बिंदिया
कानों से खुल गया बाला, बलम
मोरा बाला चन्दा ...

हो गई रे जा की चोरी
ढूंढे रे मोरे नैना
ओ छैला तोरा मनवा मैला
लागी नजरिया तोरी, बलम
मोरा बाला चन्दा ...

बाला मोरा सेजिया पे गिर गया
ना जानूँ पिया
मोरा बाला चन्दा ...
तूने चुराय लिया
दइय्या रे कल की रैना, बलम


किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

  सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 



12/4/16

ज्योति कलश छलके//.jyoti kalash chhalake .Lata_Sudhir Phadke_Pt.Narendra Sharma..a tribute


ज्योति कलश छलके
jyoti kalash chhalake
 bhabhi ki chudiyan
Lata,
1961,

         गीत
ज्योति कलश छलके
हुए गुलाबी, लाल सुनहरे
रंग दल बादल के
ज्योति कलश छलके

घर आंगन वन उपवन उपवन
करती ज्योति अमृत के सींचन
मंगल घट ढल के \
ज्योति कलश छलके




पात पात बिरवा हरियाला
धरती का मुख हुआ उजाला
सच सपने कल के \
ज्योति कलश छलके

ऊषा ने आँचल फैलाया
फैली सुख की शीतल छाया
नीचे आँचल के
ज्योति कलश छलके




ज्योति यशोदा धरती मैय्या
नील गगन गोपाल कन्हैय्या
श्यामल छवि झलके
ज्योति कलश छलके

अम्बर कुमकुम कण बरसाये
फूल पँखुड़ियों पर मुस्काये
बिन्दु तुहिन जल के
ज्योति कलश छलके

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि



22/3/16

कोई हम दम ना रहा// Koi humdum na raha (Kishore Kumar)

कोई हम दम ना रहा Movie/Album: झुमरू (1961)
Music By: किशोर कुमार
 Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: किशोर कुमार 

                   गाना
कोई हमदम न रहा, कोई सहारा न रहा हम किसी के न रहे, कोई हमारा न रहा
 शाम तन्हाई की है, आएगी मंज़िल कैसे जो मुझे राह दिखाए, वही तारा न रहा
कोई हमदम न रहा...

ऐ नज़ारों न हँसो, मिल न सकूँगा तुमसे वो मेरे हो न सके
, मैं भी तुम्हारा न रहा कोई हमदम न रहा...
 क्या बताऊँ मैं कहाँ, यूँ ही चला जाता हूँ 

जो मुझे फिर से बुला ले, 
वो इशारा न रहा कोई हमदम न रहा...

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