dil ka diya jala ke gaya लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
dil ka diya jala ke gaya लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

21/10/15

दिल का दिया जला के गया ये कौन मेरी तनहाई मे

दिल का दिया जला के गया
aakash deep
1967


     (दिल का दिया जला के गया,
ये कौन मेरी तन्हाई में) \-२
सोये नग़मे जाग उठे, होंठों की सेहनाई में
दिल का दिया ...

(प्यार अरमानों का दर खटकाए
ख़्वाब जागी आँखों से मिलने को आये)\-२
कितने साये डोल पड़े, सूनी सी अंगनाई में
दिल का दिया ...

(एक ही नज़र में निखर गई मैं तो,
आइना जो देखा संवर गई मैं तो)\-२
तन पे उजाला फैल गया, पहली ही अंगड़ाई में
दिल का दिया ...

(काँपते लबों को मैं खोल रही हूँ,
बोल वही जैसे के बोल रही हूँ)\-२
बोल जो डूबे से हैं कहीं, इस दिल की गहराई में 
दिल का दिया ...