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28/3/19

दिल क्या करे जब किसी से किसी को प्यार हो जाए,kishor kumar

दिल क्या करे जब किसी से किसी को प्यार हो जाए जाने कहाँ कब किसी को किसी से प्यार हो जाए ऊँची-ऊँची दीवारों सी इस दुनिया की रस्में न कुछ तेरे बस में जुलिए, न कुछ मेरे बस में (जैसे पर्वत पे घटा झुकती है जैसे सागर से लहर उठती है ऐसे किसी चहरे पे निगाह रुकती है) - २ हो, रोक नहीं सकती नज़रों को, दुनिया भर की रस्में न कुछ तेरे बस में जुलिए, न कुछ मेरे बस में दिल क्या करे ... आ मैं तेरी याद में सब को भुला दूँ दुनिया को तेरी तसवीर बना दूँ मेरा बस चले तो दिल चीर के दिखा दूँ हो, दौड़ रहा है साथ लहू के प्यार तेरे नस-नस में न कुछ तेरे बस में जुलिए, न कुछ मेरे बस में दिल क्या करे ...

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रिमझिम गिरे सावन, सुलग सुलग जाये मन,kishor kumar

रिमझिम गिरे सावन, सुलग सुलग जाये मन
भीगे आज इस मौसम में, लगी कैसी ये अगन
रिमझिम गिरे सावन सुलग सुलग जाये मन
भीगे आज इस मौसम में, लगी कैसी ये अगन
रिमझिम गिरे सावन...
जब घूंगरूओं सी बजती हैं बूंदे
अरमा हमारे पलकें ना मूंदे
कैसे देखे सपने नयन, सुलग सुलग जाये मन
भीगे आज इस मौसम में, लगी कैसी ये अगन
रिमझिम गिरे सावन...
महफ़िल में कैसे कह दे किसी से
दिल बंध रहा हैं, किसी अजनबीसेे
महफ़िल में…


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16/8/18

आते जाते खूबसूरत आवारा सड़कों पे/ किशोर कुमार

फिल्मः अनुरोध (1977)
गायक/ किशोर कुमार
संगीतकारः लक्षमीकांत-प्यारेलाल
गीतकारः आनंद बख्शी

आते जाते खूब्सूरत आवारा सड़कों पे
कभी कभी इत्तेफ़ाक़ से आते जाते खूब्सूरत आवारा सड़कों पे
कभी कभी इत्तेफ़ाक़ से कितने अंजान लोग मिल जाते हैं उन में से कुछ लोग भूल जाते हैं कुछ याद रह जाते हैं उन में से कुछ लोग भूल जाते हैं कुछ याद रह जाते हैं आते जाते खूब्सूरत आवारा सड़कों पे कभी कभी इत्तेफ़ाक़ से कितने अंजान लोग मिल जाते हैं उन में से कुछ लोग भूल जाते हैं कुछ याद रह जाते हैं उन में से कुछ लोग भूल जाते हैं कुछ याद रह जाते हैं आवाज़ की दुनिया के दोस्तों कल रात इसी जगह पे मुझको किस क़दर ये हसीं ख़याल मिला है राह में इक रेशमी रुमाल मिला है किस क़दर ये हसीं ख़याल मिला है राह में इक रेशमी रुमाल मिला है जो गिराया था किसी ने जान कर जिस का हो ले वो जाये पहचान कर वरना मैं रख लूँगा उस को अपना जान कर किसी हुस्न-वाले की निशानी मान कर निशानी मान कर हँसते गाते लोगों की बातें ही बातें में कभी कभी इक मज़ाक से कितने जवान किस्से बन जाते हैं उन किस्सों में चन्द भूल जाते हैं चन्द याद रह जाते हैं उन में से कुछ लोग भूल जाते हैं कुछ याद रह जाते हैं तक़दीर मुझ पे महरबान है जिस शोख की ये दास्तान है उस ने भी शायद ये पैग़ाम सुना हो मेरे गीतों में अपना नाम सुना हो उस ने भी शायद ये पैग़ाम सुना हो मेरे गीतों में अपना नाम सुना हो दूर बैठी ये राज़ वो जान ले मेरी आवाज़ को पहचान ले काश फिर कल रात जैसी बरसात हो और मेरी उस की कहीं मुलाक़ात हो लम्बी लम्बी रातों में नींद नहीं जब आती कभी कभी इस फ़िराक़ से कितने हसीं ख़्वाब बन जाते हैं उन में से कुछ ख़्वाब भूल जाते हैं कुछ याद रह जाते हैं उन में से कुछ लोग भूल जाते हैं कुछ याद रह जाते हैं आते जाते खूब्सूरत आवारा सड़कों पे कभी कभी इत्तेफ़ाक़ से कितने अंजान लोग मिल जाते हैं उन में से कुछ लोग भूल जाते हैं कुछ याद रह जाते हैं


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23/3/16

पग घुँघरू बांध मीरा //Namak Halaal - Ke Pag Ghunghroo Bandh Meera - Kishore Kumar - Chorus

पग घुँघरू बांध मीरा
फिल्म -नमक हलाल
गायक - किशोर कुमार
पर्दे पर -अमिताभ बच्चन
1982

song

बुजुर्गों ने फ़रमाया की पैरों पे अपने खड़े होके दिखलाओ
फिर ये ज़माना तुम्हारा है

ज़माने के सुर ताल के साथ चलते चले जाओ

फिर हर तराना तुम्हारा, फ़साना तुम्हारा है

अरे तो लो भैया हम

अपने पैरों के ऊपर खड़े हो गए

और मिला ली है ताल

दबा लेगा दाँतों तले उँगलियाँ-लियां

ये जहां देखकर, देखकर अपनी चाल



के पग घुंघरू बाँध मीरा नाची थी

और हम नाचे बिन घुंघरू के

वो तीर भला किस काम का है

जो तीर निशाने से चूके-चूके-चूके रे

बाखुदा शक्ल से तो चोर नज़र आते हैं
उम्र गुज़री है सारी चोरी में

सारे सुख-चैन बंद जुर्म की तिजोरी में 

आपका तो लगता है बस यही सपना

राम-राम जपना, पराया माल अपना

वतन का खाया नमक तो नमक हलाल बनो

फ़र्ज़ ईमान की जिंदा यहाँ मिसाल बनो

पराया धन, परायी नार पे नज़र मत डालो

बुरी आदत है ये, आदत अभी बदल डालो

क्योंकि ये आदत तो वो आग है जो

इक दिन अपना घर फूंके-फूंके-फूंके रे

के पग घुंघरू...



मौसम-ए-इश्क में मचले हुए अरमान है हम
दिल को लगता है के दो जिस्म एक जान है हम
ऐसा लगता है तो लगने में कुछ बुराई नहीं
दिल ये कहता है आप अपनी हैं पराई नहीं
संगमरमर की हाय, कोई मूरत हो तुम

बड़ी दिलकश बड़ी ख़ूबसूरत हो तुम

दिल-दिल से मिलने क कोई महूरत हो

प्यासे दिलों की ज़रुरत हो तुम

दिल चीर के दिखला दूं मैं, दिल में यहीं सूरत हसीं

क्या आपको लगता नहीं हम हैं मिले पहले कहीं

क्या देश है क्या जात है

क्या उम्र है क्या नाम है

अरे छोड़िये इन बातों से

हमको भला क्या काम है

अजी सुनिए तो

हम आप मिलें तो फिर हो शुरू

अफ़साने लैला मजनू, लैला मजनू के

दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना //DUKHI MAN MERE , SUN MERA KEHNA-FUNTOOSH (1956)-SAHIR - KISHORE KUMAR-S ...


दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना 
फंटूश 
१९५६
 गायक: किशोर
 गीत: साहिर
 संगीत: सचिन देव बर्मन


                                गाना

दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना जहां नहीं चैना वहां नहीं रहना
दुखी मन मेरे, सुन मेरा कहना
जहाँ नहीं चैना, वहां नहीं रहना

दर्द हमारा कोई न जाने, अपनी गरज के सब हैं दीवाने
किस के आगे रोना रोये, देस पराया लोग बेगाने

लाख यहाँ झोली फैला ले, कुछ नहीं देंगे इस जगवाले
पत्थर के दिल मोम ना होंगे, चाहे जितना नीर बहा ले

अपने लिए कब हैं ये मेले, हम हैं हर एक मेले में अकेले
क्या पायेगा उस में रह कर, जो दुनियाँ जीवन से खेले

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