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12/4/16

मेरे देश की धरती // Mere Desh Ki Dharti - Upkar [1967] - Mahendra Kapoor


मेरे देश की धरती
Movie/Album: उपकार
1967
Music By: कल्याणजी-आनंदजी
Lyrics By: गुलशन बावरा
Performed By: महेंद्र कपूर
   
   
गीत 

मेरे देश की धरती
सोना उगले
उगले हीरे मोती
बैलों के गले में जब घुंघरू
जीवन का राग सुनाते हैं
गम कोसों दूर हो जाता है
खुशियों के कँवल मुसकाते है
सुन के रहट की आवाजें
यूं लगे कहीं शहनाई बजे
आते ही मस्त बहारों के
दुल्हन की तरह हर खेत सजे
मेरे देश की धरती...
जब चलते हैं इस धरती पे हल
ममता अंगडाइयाँ लेती है
क्यों ना पूजे इस माटी को
जो जीवन का सुख देती है
इस धरती पे जिसने जनम लिया
उसने ही पाया प्यार तेरा
यहाँ अपना पराया कोइ नहीं
है सब पे माँ, उपकार तेरा
मेरे देश की धरती...
ये बाग़ है गौतम नानक का
खिलते हैं अमन के फूल यहाँ
गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक
ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ
रंग हरा हरी सिंह नलवे से
रंग लाल है लाल बहादूर से
रंग बना बसन्ती भगत सिंह
रंग अमन का वीर जवाहर से
मेरे देश की धरती...,

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7/3/16

दीवानों से ये मत पूछो // Diwano Se Ye Mat Puchho Diwano Pe Kya Guzari Hai फिल्म - Upkar

दीवानों से ये मत पूछो 
 Diwano Se Ye Mat Puchho 
गायक : मुकेश,
संगीतकार : कल्याणजी आनंदजी,



दीवानों से ये मत पूछो

दीवानों पे क्या गुज़री है

हाँ उनके दिलों से ये पूछो

अरमानों पे क्या गुज़री है

दीवानों से ये...


औरों को पिलाते रहते हैं
और ख़ुद प्यासे रह जाते हैं
ये पीने वाले क्या जाने
पैमानों पे क्या गुज़री है
दीवानों से ये..

मालिक ने बनाया इन्सां को
इनसान मुहब्बत कर बैठा
वो ऊपर बैठा क्या जाने
इनसानों पे क्या गुज़री है